Saturday, July 25, 2009

अक्षर,शब्द और भाषा-हिंदी कविता (akshara,shabda & bhasha-hindi kavita)

अकेला अक्षर कभी शब्द नहीं बनता
अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता।
कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह
जिससे उनका निज परिचय बनता।
एक का अस्तित्व कौन जानेगा
जब तक दूसरा नहीं दिखेगा
कहीं से पढ़कर ही कोई अपने हाथ से लिखेगा
भाषा में एक अकेला शब्द अहंकार भी है
जिसके भाव के इर्द गिर्द घूम रहा हर कोई
विनम्रता से परे सारी जनता।
अक्षर का अकेलापन
शब्द का बौनापन
बृहद भाषा समूह के बिना दर्दनाक होता है
जो जान लेता है
वही सच्चा लेखक बनता

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लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर परिभाशा है आभार

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  2. अक्षर का अकेलापन
    शब्द का बौनापन
    बृहद भाषा समूह के बिना दर्दनाक होता है
    जो जान लेता है
    वही सच्चा लेखक बनता
    सच कहना है आपका।

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