Friday, December 26, 2008

दुःख की अनुभूति-हिंदी शायरी

ऊंचा मकान है
जिसके चारों और फैली हरियाली
अंदर कमरें में महंगे सोफे पर वह शख्स
सामने टीवी पर चलते दृश्य
हाथों में रिमोट से
बदलता है वह परिदृश्य
दिमाग में छाये तनाव के बादल
भौतिकता के शिखर पर बैठकर
बेचैनी उसका पीछा नहीं छोड़ती

आखिर दौलत,शौहरत और बड़ा ओहदा
सुख का प्रतीक माने जाते
पर फिर भी दुःख की अनुभूति
यह सब कुछ मिल जाने पर
आदमी का पीछा क्यों नहीं छोड़ती

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लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

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