जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर
और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं।
तब याद आती है
सुबह अखबार में छपी तरक्की की खबरें
और उसे सभी में बांटने के लिये
शोर करते लोगों के जूलूस की फोटो याद
तब बरबस हंसी आ जाती है
उनको कल्पनातीत पाता हूं।
--------------------
लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप
बहुत खुब लाजवाब रचना।
ReplyDelete