Sunday, December 11, 2011

जैसी नज़र वैसी तस्वीर-हिन्दी शायरी (tasweer or tasvir aur nazar-hindi shayari)


रिश्ते जो दूर हो गये
यादों में धुंधले हो जाते हैं,
उनके साथ गुजरे पल
याद्दाश्त से होते हैं बाहर
मतलब है जिनसे
वही यार ताजगी भर पाते हैं,
कहें दीपक बापू
इस दुनियां में धोखा भी
वफा भी मिल जाती है
मगर लोगों के नजरिये अलग अलग
जिसकी नजर जैसी
वैसी ही तस्वीर वह सामने पाते हैं।
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कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
poet, Writer and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
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