Saturday, December 07, 2013

भलाई और मलाई-हिन्दी कविता(bhalai aur malai-hindi poem's)



असुरों के अपराध पर करते हैं बहस
महिलाओं के हक हड़पने पर
समाज को कोसते हैं,
देवताओं पर लगाते पुरुष होने का आरोप
तोहमत कानून पर थोपते हैं।
कहें दीपक बापू अंग्रेजों ने समाज बांटा,
बुद्धिजीवी लगा रहे हर टुकड़े
बेकार के तर्कों का कांटा,
कोई कर रहा बाल कल्याण,
कोई महिलाओं की रक्षा के लिये चला बाण,
कोई गरीब को अमीर बनाने में जुटा,
कोई बीमार के लिये हमदर्दी रहा लुटा,
हजारों हाथ उठे दिखते हैं
जमाने की भलाई के लिये
मलाई मिलने का मौका मिलते ही
कमजोरों की पीठ में छुरा घौंपते हैं।
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लेखक और कवि-दीपक राज कुकरेजा "भारतदीप"
ग्वालियर, मध्यप्रदेश 
Writer and poet-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior, Madhya pradesh
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
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