Tuesday, April 08, 2014

लोगों के मसले पैने हैं-हिन्दी व्यंग्य कविता



टुकड़ों टुकड़ों में बंटा है समाज,
हर इंसान अपनं मतलब के लिये बन जाता बाज़,
छिपा रहा है हर कोई अपने बुरे कारनामो के  राज,
फिर भी मानते हैं सभी
कोई फरिश्ता आसमान से उतरकर आयेगा,
जहान में एकता कायम कर पायेगा।
कहें दीपक बापू मन का वहम है
या खुद को ही धोखा खा देना
यह सोचना कि सर्वशक्तिमान
इंसानों में किसी को अपने जैसा बनायेगा।
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लेखक और कवि-दीपक राज कुकरेजा "भारतदीप"
ग्वालियर, मध्यप्रदेश 
Writer and poet-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior, Madhya pradesh
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
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