Thursday, June 19, 2014

कब तक हिन्दी विरोध करेंगे-हिन्दी व्यंग्य कवितायें(kab tak hindi virodh karenge-hindi satire poem)



हिन्दी भाषा का विरोध वह हमेशा जमकर करेंगे,
अंग्रेजी की गुलामी करते हुए सीना चौड़ा करेंगे।
कहें दीपक बापू रस्सी जलती पर ऐंठन नहीं जाती
कब तक ऐसे लोग राष्ट्रभाषा से पूरी ताकत से लड़ेंगे।
-------------------
अंग्रेजी में अपने कारनामों का वह काला रंग भरते हैं,
हिन्दी भाषा में उनका सच न आये इसलिये वह डरते हैं।
कहें दीपक बापू देश पर अंग्रेजी के वकालत करने वाले बहुत
अपने पाखंड पर हिन्दी में अभद्र शब्दों के प्रहार से कंपते हैं।
-----------
वह हिन्दी से मूंह चुराकर अंग्रेजी के साथ डोलेंगे,
पेट भरे अंग्रेजी से उनके इसलिये हिन्दी में जुबान नहीं खोलेंगे।
कहें दीपक बापू अंग्रेजी में सीना तना रहा जिनका
उतर जायेगा जब अहंकार हिन्दी में ही रोते हुए बोलेंगे।
----------------

लेखक और कवि-दीपक राज कुकरेजा "भारतदीप"
ग्वालियर, मध्यप्रदेश 
Writer and poet-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior, Madhya pradesh
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका

४.दीपकबापू कहिन
5.हिन्दी पत्रिका 
६.ईपत्रिका 
७.जागरण पत्रिका 
८.हिन्दी सरिता पत्रिका 
९.शब्द पत्रिका

No comments:

Post a Comment

अपनी प्रतिक्रिया दें