Monday, October 12, 2009

जब सचमुच चिराग जलाओगे-व्यंग्य कविता (sach ke chirag-hindi vyangya kavita)

शोर कर रही भीड़ में
शांति कराने के लिये
बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे
तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओगे।
अंधेरे में खड़े लोगों से
रौशनी का वादा करते रहो
तारीफों के कसीदे पढ़े जाते रहेंगे,
लोग भूल जायेंगे अपनी तकलीफ
तब कोई नहीं देखेगा तुम्हारी तरफ
जब सचमुच चिराग जलाओगे।

...............................
यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका

लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

No comments:

Post a Comment

अपनी प्रतिक्रिया दें