Monday, January 19, 2009

इंटरनेट पर अच्छा लिखवाने के लिये आम पाठक को टिप्पणियां लिखनी होंगी-आलेख

इंटरनेट पर ब्लाग पर रुचिकर विषयों पर न लिखने की शिकायत करने वाले पाठक बहुत बड़ी संख्या मेें मिलने लगे है। यह शिकायतें इंटरनेट से बाहर जब सुनने को मिलती हैं तो इसके प्रत्युत्तर में जब प्रश्न उठाये जाता है तो पाठक स्वयं भी बगलें झांकने लगते हैं।
इंटरनेट के बाहर पाठकों ने कहा
1.हिंदी ब्लाग पर कोई अच्छी रचनायें पढ़ने को नहीं मिलतीं।
2.ब्लाग लेखक टाईम पास करते हैं या अपनी भड़ास निकालते हैे।
3.ब्लाग लेखक लिखने से अधिक अपने आपको प्रदर्शित करना चाहते हैं।
4.वह फालतू कवितायें लिखते हैं जिनको पढ़ने में मजा नहीं आता।

आम पाठक से सवाल किया जाता है
1.क्या तुमने कभी किसी लेखक से टिप्पणी लिखकर यह बात कही है कि कुछ बेहतर लिखे।
2.क्या अच्छा लिखने पर उसकी प्रशंसा में टिप्पणी की है।

जवाब नहीं मिलता या मिलता तो यह है कि ‘ब्लाग पर हम तो टिप्पणी नहीं लिख सकते। कौन चक्कर में पड़े?’

आम पाठको को यह बात शायद मालुम नहीं है कि हिंदी में जो ब्लाग लेखक हैं उनमें से अधिकांशतः अव्यवसायिक हैं। इनमें से कोई भी ऐसा नहीं है जो अपने पूरे परिवार का क्या अपनी जेब का खर्चा तक नहीं निकाल पाते। अधिकतर लोग अपनी जेब से पैसा खर्च कर लिखने का शौक पूरा कर रहे हैं। जिन ब्लाग लेखकों से वह साहित्य जैसा लिखने की अपेक्षा कर रहे हैं वह कोई अभिनेता,प्रसिद्ध पत्रकार और पूंजीपति नहीं हैं जो पैसे और प्रसिद्ध के दम पर पाठक जुटा लें। सच तो यह है कि अनेक लेखक बहुत अच्छा लिख सकते हैं पर प्रोत्साहन के अभाव में वह ऐसा नहीं कर पाते। सच बात तो यह है कि ब्लाग लेखक अभी तक आपस में ही एक दूसरे को प्रोत्साहित कर रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि आम पाठक अभी उनसे नहीं जुड़ा है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका लिखा कोई पढ़े और लेखक चाहता है कि अधिक से अधिक पाठक उससे जुड़ेंे। आम पाठक की आमद वैसे ही कम है और ऐसे में उसकी उपेक्षा हिंदी ब्लाग लेखकों को निराश कर देती है। हो सकता है कि पाठकों ने कुछ विज्ञापन वाले ब्लाग देखें हों और यह भ्रम पाल लिया हो कि वह भी अखबार वालों की तरह कमा रहे हैं। दरअसल ब्लाग पर लगे विज्ञापन पर क्लिक करने पर ही ब्लाग लेखक को पैसा मिलता है और उसके लिये कम से कम दस हजार पाठक ईमानदारी से चाहिये जो उसे क्लिक करें। अगर कुछ पाठकों ने एक उद्देश्य के तहत किसी ब्लागर को पैसा दिलाने के लिये अनावश्यक रूप से विज्ञापनों पर क्लिक किया तो वह भी पकड़ में आ जायेगा और वह उसे नहीं मिलेगा। यानि कुछ पाठक मिलकर चाहें तो भी किसी ब्लागर को पैसा नहीं दिलवा सकते।

ऐसे में आम पाठक अगर ब्लाग लेखकों से बेहतर लिखने की अपेक्षा कर रहा है तो उसे ब्लाग लेखकों के पाठों पर टिप्पणी रखकर उसे प्रोत्साहित करना चाहिये। हिंदी के ब्लाग लेखक अपनी तरफ से भरसक प्रयास कर रहे हैं कि वह बेहतर लिखें पर आम पाठकों को भी इसमें सक्रिय योगदान देना होगा। अभी तक जो ब्लाग पर टिप्पणियां आती हैं वह ब्लाग लेखकों की होती हैं जो आपस में एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं। पिछले दो बरसों से हम देख रहे हैं कि ब्लाग लेखकों ने ही अभी तक इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने का बीड़ा उठाये रखा है पर आम पाठक यहां की रचनाओं को ऐसे ही पढ़कर भूल जाता है जैसे कि वह अखबार या पत्रिका पढ़ रहा हो। याद रखिये अखबार या पत्रिका के लिये एक राशि देनी पड़ती है तब भला यहां टिप्पणी रखकर वह कीमत क्यों नहीं चुकाना चाहते? शायद कुछ आम पाठक यह सोचें कि वह भी तो इंटरनेट का पैसा व्यय कर रहे हैं तो फिर इसका जवाब यह है कि ब्लाग लेखक भी तो आखिर जेब से खर्च कर लिख रहे हैं। ऐसे में आम पाठक का क्या यह दायित्व नहीं बना कि वह अपनी टिप्पणी लिखकर उसकी ब्लाग लेखक की कीमत अदा करे।

इस देश में अधिकतर पाठक तो ऐसे भी हैं जिनको सर्च के दौरान हिंदी के ब्लाग उनके सामने आ जाते हैं जबकि वह अंग्रेजी में कुछ ढूंढ रहे होते हैं। तब उनके सामने पड़े ब्लाग का पाठ शायद उनको समझ में नहीं आता हो तब उन्हें यह भी नहीं सोचना चाहिये कि सभी ब्लाग लेखक ऐसे ही लिखते हैं। हालांकि न समझ आने का कारण यही होता है कि आप उस विषय में या तो रुचि कम रखते हैं या उसकी जानकारी नहीं है। अगर आप अंतर्जाल पर सैक्सी कहानियां पढ़ने का विचार करते हों तो यकीनन हास्य कविता या व्यंग्य आपकी समझ में फालतू का विषय है। स्थिति इसके विपरीत भी हो सकती है। इसके बावजूद यह सच है कि हिंदी ब्लाग जगत पर कई ऐसे कटु और मनोरंजक सत्य देखने और पढ़ने को मिलते हैं जो समाचार पत्र पत्रिकाओं में नहीं मिलते। अगर आम पाठक यह चाहते हैं कि हिंदी के ब्लाग लेखक और बेहतर,रुचिकर तथा मनोरंजक लिखें तो उनको अपने ऊपर यह जिम्मेदारी उठानी होगी कि वह ब्लोग पर टिप्पणियां लिखें चाहे भले ही रोमन लिपि में हों-ऐसे में हिंदी के ब्लाग लेखक से हिंदी टूल भी मांगें जो निश्चित रूप से आपको वह उपलब्ध करा देगा। हिंदी के ब्लाग लेखकों में अपने पाठकों के लिये जो दरियादिली है उसे कोई ब्लाग लेखक ही जान पाता है पर अब आम पाठकों को भी उनको आजमाना होगा।

जहां तक कविताओं का सवाल है तो यह बात स्पष्ट रूप से समझ लें कि वह इन ब्लाग को अखबार या पत्रिका न समझें। यहां लिखना और उसे प्रकाशित करने में ब्लाग लेखकों को जो समय लगता है उसका उसे कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता। फिर यहां कविता को भी आप गद्य समझ कर पढ़ें। अगर बड़े लेख और कहानियां यहां वैसे ही लिखी जायेंगी तो आपको भी परेशानी आयेगी। अंतर्जाल पर गागर में सागर भरने को प्रयास ब्लाग लेखक कर रहे हैं और ऐसे में आप एक चम्मच भर पानी के रूप में टिप्पणी ही रख दें तो बेहतर होगा। ब्लाग लेखक अभी तक मोर्चा संभाले हुए हैं अब आम हिंदी पाठक को भी सक्रिय होना होगा तभी शायद वह बेहतर रचनायें पढ़ पायेंगे।
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3 comments:

शाश्‍वत शेखर said...

सहमति है आपसे।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

दीपक जी, रोज़ कितने लेख डालते हो भाई... :)

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

बहुत ही सुन्दर लेख
उम्मीद है पाठकों में कुछ जागरूकता आएगी

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