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Tuesday, February 03, 2009

असली परीक्षा सर्च इंजिनों पर होनी है-आलेख

अगर मेरे ब्लाग केवल ब्लागस्पाट के ही होते तो शायद कम पाठक संख्या देखकर मैं भी बहुत दुखी होता पर वर्डप्रेस के ब्लाग मुझे हमेशा व्यस्त रखते हैं। एक तरह से देखा जाये तो ब्लाग स्पाट पर लिखे गये ब्लाग ऐसे ही हैं जैसे कि अपनी डायरी लिख रहे हों जिसे अपने ही मित्र पढ़ सकें और सर्च इंजिनों पर अगर पकड़ा जाये तो अन्य पाठक भी पढ़ सकें। इसके विपरीत वर्डप्रेस के ब्लाग ऐसे लगते हैं जैसे कि स्वयं की पत्रिका हो जहां पाठक निरंतर आते हैं। यही कारण है कि अधिकतर निराशा वाली बातें केवल ब्लागस्पाट पर लिखने वाले ही ब्लाग लेखक और लेखिकायें करते हैं जबकि वर्डप्रेस वाले अपने ब्लाग के उतार चढ़ाव देखकर उसका सुख अनुभव करते हैं।

अंतर्जाल पर बहुत सारी वेबसाईटें और फोरम हैं जो हमारे ब्लाग के लिंक लगाते हैं। वहां से भी बहुत सारे पाठक आते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि वहां से आये अधिकतर पाठक वर्डप्रेस के ब्लाग पर ही आते हैं। कुछ अंतर्जाल लेखकों को बहुत दुख होता है जिनको विभिन्न फोरमों पर अन्य के मुकाबले अपने ब्लाग के पाठ पर व्यूज कम लगते हैं। मुझे चारों फोरमों पर-नारद ब्लागवाणी,चिट्ठाजगत और हिंदी ब्लाग-व्यूज और कमेंट कम ही मिलते हैं पर मित्रों के ब्लाग पढ़ने और उनके सामने अपनी रचनायें प्रस्तुत करने का मोह इससे कम नहीं होता। मेरा मुख्य लक्ष्य है अंतर्जाल पर सच इंजिनों पर अपनी रचनायें पहुंचाना। इसके लिये मुझे वर्डप्रेस के ब्लाग बहुत सारी सुविधायें मिलती हैं। सबसे अधिक यह कि वहां अधिक टैग लगाने की सुविधा। वैसे शायद यह सुविधा ब्लागस्पाट पर भी है क्योंकि अनेक लोग 200 वर्णों से अधिक के टैग लगाते हैं पर पता नहीं वह बताते क्यों नहीं?
विभिन्न फोरमों पर अपने ब्लाग पर लिखी गयी पोस्ट त्वरित रूप से दिखाई देती है और जब तक वह ऊपर है उसको पढ़ा जा सकता है तब तक पाठक आते हैं मगर बाद में वह कम हो जाते है। फोरमों पर कम व्यूज देखा जाये तो मुझे स्वयं को फ्लाप ब्लाग लेखक मानने में संकोच नहीं होता। वैसे वहां के व्यूज देखकर किसी भी ब्लाग लेखक को निराश नहीं होना चाहिये। उनको मुख्य रूप से यह देखना चाहिये कि सर्च इंजिनों से कितने व्यूज आ रहे हैं।
सर्च इंजिनों से लोग अपनी रुचि के अनुसार हिंदी व अंग्रेजी में शब्द लिखकर विषय सामग्री ढूंढते हैं और अगर हमारा ब्लाग में वह सामग्री है तो वह उसके सामने आती है। मेरे ब्लाग स्पाट के ब्लाग तो ब्लागवाणी पर दिखते हैं पर वर्डप्रेस के ब्लाग वहां से मैने हटवा लिये क्योंकि मैं उन पर अब ब्लाग स्पाट पर लिखी गये चुनींदा पाठ ही वहां प्रकाशित करता हूं और चूंकि अधिकतर ब्लाग लेखक वहां रहते हैं इसलिये उनको मेरे ब्लाग के पाठों का दोहराव न दिखे। फिर भी एक बार मैंने चर्चित विषय पर एक नवीन पाठ वर्डप्रेस के ब्लाग पर लिखा तो उस पर दो दिन में सौ पाठक आये। कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि ब्लाग स्पाट पर लिखे गये पाठ को अधिक पाठक नहीं मिले पर वही पाठ वर्डप्रेस पर प्रकाशित किया तो वहां पंद्रह दिन में तीन सौ पाठक पढ़ने के लिये आये।

मुझे हैरानी इस बात की है कि फोरमों पर एक दूसरे के हिट देखकर परेशान होने या आरोप प्रत्यारोप लगाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसा लगता है कि इन फोरमों पर को ही सब कुछ मानकर वहां हिट पाने के लिये लोग ललायित हैं और इसी प्रयास में उनकी रचनाओं की धार कुंठित हो जाती हैं। एक बात याद रखने वाली है कि मेरा अनुभव तो यही कहता है कि जब तक आम पाठकों की रुचि के विषयों पर नहीं लिखेंगे तब तक स्थाई रूप से सफलता नहीं मिल सकती। मेरे कुछ निजी मित्र जब अखबारों में ब्लाग लेखकों में मेरा नाम न देखकर आश्चर्य से पूछते हैं कि ‘क्या अंतर्जाल पर तुम्हारा कोई मित्र नहीं है जो अखबारों में तुम्हारा नाम छाप सके।’
कुछ मित्र मेरे ब्लाग के ही माध्यम से विभिनन फोरमों पर गये तो उन्होंने टिप्पणी की कि ‘वहां भी वैसा ही सब कुछ चल रहा है जैसे कि हिंदी के साहित्य के प्रकाशन में चलता है। वहां तुम्हें वैसे ही कोई महत्व नहीं देगा जैसे कि बाहर नहीं दिया।’

अवसर मिलते ही मैं लिखता हूं और पूरे मजे लेता हूं और वह इतने होते हैं कि किसी पाठ का हिट होना मुझे प्रसन्न नहीं करता और फ्लाप हो जाना चिंता में नहीं डालता।
ब्लागिंग का मजा तभी है जब अपना पाठ लिखो और उसकी शक्ल तक किसी फोरम पर मत देखों बल्कि वहां एक पाठक की तरह दूसरों के पाठ पढ़ो। उनको पढ़कर उन पर अपनी राय कायम करो। टिप्पणियों की चिंता तो यहां करना भी नहीं। अगर आप बढ़े लेखक बन गये तो आम पाठक अपने आप ही टिप्पणियां करेंगे और नहीं तो आपके मित्र ब्लाग लेखक ही करेंगे और वह भी जितनी उनकी क्षमता होगी। तय बात है कि यह क्षमता भी उतनी ही होगी जितनी आप टिप्पणियां करेंगे।

वैसे ब्लाग का एक उद्देश्य यह है कि आप वहां संदेश रखें और दूसरा उसे पढ़कर रखे पर अपने यहां इसका उपयोग चूंकि एक पत्रिका की तरह भी हो रहा है तो फिर यह जरूरी नहीं है कि सभी आपके पाठों पर टिप्पणी करें। एक बात है कि जब आप अपने लिखे पर वाह वाही सुनना चाहते हैं तो इसका आशय यह कि आपने लिखने का मजा ही नहीं लिया और अगर आपको आपने लिखने के बाद वाह वाही की चिंता नहीं है तो समझ लीजिये कि आपने पूरा मजा लिया। हां, अंतर्जाल पर लिखते हुए त्वरित पाठक या टिप्पणियों से सफलता का आधार नहीं है बल्कि हिंदी का बृहद स्वरूप सर्च इंजिनों से आये पाठक ही निर्धारित करेंगे। इसलिये सर्च इंजिनों तक पहुंचने का लक्ष्य तय करना चाहिये क्योंकि असली परीक्षा वहीं होनी है।
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