Monday, March 30, 2009

भीड़ में अपना मुकाम तभी बनाओगे-हिंदी शायरी

कहीं समर्थन की माला चढ़ाओ
या फिर विरोधी चिंगारी जलाओ
नहीं तो बाजार से बाहर हो जाओगे।
भीड़ में जाकर छोर मचाओ
या जंगल में कहीं चले जाओ
खड़े देखते रहे खाली
तो कमअक्ल कहलाओगे।
बिक गयी है यहां सोच सभी की
किसी के गुलाम होकर पीछे चलो
या आजादी से अपने गीत गाओ
खामोश रहे तो गूंगे कहलाओगे।
दूसरे के दर्द पर हंसना नहीं
अपने गमों के जहर से किसी को डसना नहीं
किसी गरीब पर अपनी जुबां से
कभी फब्तियां कसना नहीं
अपने यकीन की राह से भटकना नहीं
जिंदगी के अपने उसूलों पर ही
खड़े करना अपनी कामयाबी की इमारत
तभी इस भीड़ में अपना मुकाम बनाओगे।
........................................
खुश होने के लिये बहानों को
क्या ढूंढना
एक नहीं हजार मिलते हैं
खोल रखे हैं जिन्होंने अपने दिल के दरवाजे
वह खुशी के आने के इंतजार में
आखों की खिड़कियों पर लगाने के लिये
महंगे परदे नहीं सिलते हैं।

......................
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कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

1 comment:

Madhaw Tiwari said...

Aapke Bhai Ki Bhabhi Ki...
Saas Ke Bhai Ki Biwi Ki...
Saas Ke Pati Ke Jamai Ke...
Pote Ki Maa Ki Nanand Ka
Bhai Apka kaun Hai???

jawab dijiye

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