Tuesday, October 02, 2018

राम का नाम लेते हुए महलों में कदम जमा लिये-दीपक बापू कहिन (ram nam japte mahalon mein kadam jama dtla-DeepakBapukahin)



जिसमें थक जायें वह भक्ति नहीं है
आंसुओं में कोई शक्ति नहीं है।
कहें दीपकबापू मन के वीर वह
जिनमें कोई आसक्ति नहीं है।
---
सड़क पर चलकर नहीं देखते
वातानुकूलित कक्ष में बांचे दर्द
कहें दीपकबापू थैला लेकर घूमे
महलों में जा बसे अब हमदर्द।
---
राम का नाम लेते हुए
महलों में कदम जमा लिये।
कहें दीपकबापू मंदिर के बाहर
धर्मनिरपेक्ष प्रसाद के पेड़े सबको थमा दिये।
---
शौचालय में सोचना बुरा नहीं
अगर जिंदगी संवरने की बात हो।
दिनभर शौचलाय की सोचना बुरा है
कहीं चिंताओं न पूरी रात हो।।
---
अपनी नीयत के दाग छिपते नहीं
लोग ज़माने पर उंगली उठाते हैं।
कहें दीपकबापू धवल हृदय है
वही सब पर प्रशंसा फूल लुटाते हैं।
---
थकवाट बीमारी के बनाकर बहाने
बच रहे काम से सभी सयाने।
कहें दीपकबापू अपनी जुबा के शब्द
सच करते प्रकट यह भी जाने।
---
इंसानों का क्या भरोसा
कब दोस्त से दुश्मन बने।
कहें दीपकबापू दोष किस दें
सब लोग हालातों के गुलाम जो बने।
-------

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

लोकप्रिय पत्रिकाएँ

विशिष्ट पत्रिकाएँ