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Wednesday, January 14, 2009

छाया के पीछे-हिंदी शायरी

हंसने की चाहत है जिसमें
उसे चुटकुले सुनने का इंतजार नहीं होता
अपनी करतूतों में ही छिपे होते है
हंसने के ढेर सारे बहाने
किसी के दर्द उठने का इंतजार जरूरी नहीं होता
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नींद भरी आंखों में
पर फिर भी आती नहीं
खुशियां बिखरी पड़ी हैं चारों ओर
पर अपने दिल के दरवाजे पार आती नहीं
खड़े होकर देख रहे हैं उन शयों को
जो बहुत अच्छी लगती है
पर वह हमारे पास आती नहीं
दिल और दिमाग के पर्दे बंद कर
जिंदगी बिताने के आदी हो चुके लोग
इंतजार करते हैं मजे लेने का
पर कैसे होते है जानते नहीं
दौड़ते जाते हैं छाया के पीछे
जो किसी की पकड़ में आती नहीं

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Tuesday, December 09, 2008

विश्वास करने के सजा धोखा कर दे जाते-हिन्दी शायरी

शादी में शराब पीकर
नृत्य करते हुए
ऊपर गालिया दागते हुए
लोग बन्दर जैसे नजर आते
और बन्दर कहो तो चिढ जाते
किससे कहें अपने मन की बात
इंसानों के भेष में में सांप-बिच्छू , भेडिये
और सियार हमारे सामने आते
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किताबों पढ़कर चंद शब्द लेकर
चल रहे हैं साथ लेकर उपाधियों के झुंड
दिखते हैं नरमुंड
बोलते हैं प्यार से जैसे अपने हों
दिखाते हैं ऐसे सच जो सिर्फ सपने हों
मौका पाते ही पीठ में चुरा घोंप जाते
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कितनी बार तो निकला होगा
लहू हमारी पीठ से
जब भी पाला पडा किसी ढीठ से
अब तो चेहरे पर नकाब लगाकर
वह कत्ल नहीं करते
मुट्ठी में सब बंद है सब फैसले उनके
बिना जिरह के ही फ़ैसले करते
विश्वास करने की सजा
धोखा कर दे जाते

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